ध्रुव जुरेल: भारतीय क्रिकेट का उज्ज्वल सितारा

Biography of Dhruv Jurel

(Dhruv Jurel) ध्रुव जुरेल, जिनका जन्म 22 दिसम्बर 2001 को हुआ था, भारतीय क्रिकेट में एक उभरता हुआ युवा प्रतिभा है, जो एक विकल्पी विकेटकीपर और नेतृत्व कौशलों के साथ समृद्धि कर रहा है। उनका यह सफर जूनियर स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का है, जो संघर्षशीलता, प्रतिभा, और भारतीय क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण एक्टर बनने की संकेत कर रहा है।

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शुरुआती जीवन और क्रिकेट का प्रारंभ:

एक छोटे गाँव से आए ध्रुव जुरेल ने युवा आयु में ही क्रिकेट के प्रति अपनी उत्साहित भावना का निर्माण किया। उनका क्रिकेट जगत में प्रवेश जूनियर स्तर से हुआ, जहां उन्होंने अपने कौशलों को सुधारने और खेल की समझ को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए। उनकी समर्पण और मेहनत ने उन्हें सेलेक्टर्स और क्रिकेट जगत की दृष्टि में लाने में सफलता प्रदान की।

ध्रुव जुरेल ने अपने 22 साल के छोटी सी उम्र में उन्हें बहुत से कारनामे किए। वो आगरा के रहने वाले जिनके पिता जी सेना में कार्यकर्ता थे, उन्होंने कारगिल युद्ध में भाग लिया था। जब ध्रुव जुरेल 10 साल के भी नहीं थे, जब उनके पिता जी बतौर हबलदार सेना से रिटायर हो गए थे। इस समय जुरेल आगरा के आर्मी स्कूल में पढ़ाई करते थे, उनके पिता नेम सिंह चाहते थे कि उनका बेटा सेना में अफसर बने और देश की सेवा करे, इसी वजह से उनके पिता ने जुरेल को खेल से जुड़े गतिबिधियों में भाग लेने को कहा ।

जब स्कूल में 2 महीने का खेल का कैंप शुरू हुआ तो ध्रुब जुरेल ने तैराकी में भाग लेने के लिए अपने दोस्तों के साथ चले गए लेकिन उनको क्रिकेट में दिलचस्पी थी। बचपन में ध्रुव ने अपने पिता जी से झूठ बोला था कि वो स्कूल में सिर्फ तैराकी सीख रहे हैं। जब ये बात उनके पिता जी को पता चली कि ध्रुव ने क्रिकेट कोचिंग के लिए दाखिला लिया है, तो फिर उन्हें अपने पिता जी के गुस्से का सामना करना पड़ा। जब तैराक की कक्षाएं चलती थी तब ध्रुव क्रिकेट खेलते हुए या बेहरतीन शॉट लगाते हुए दिखते थे।

जुरेल को क्रिकेट बहुत पसंद आने लगा या उन्हें तारकी छोड़ क्रिकेट में नाम लिखा लिया। उनके पिता को भी जल्दी एहसास हुआ कि बेटा क्रिकेट को लेकर काफी परेशान है या फिर उनके पिता ने क्रिकेट खेलने की अनुमति दी। ध्रुव बहुत ज्यादा गरीब घर से थे इसलिए उनके पिता जी ने ध्रुव के लिए बल्ला लेन के लिए अपने दोस्तों से 800 रुपये का कर्ज लिया था।

ध्रुव को पिता का मिला समर्थन

ध्रुव के पिता जी चाहते थे कि उनका बेटा सरकारी नौकरी की तैयारी करे पर ध्रुव को क्रिकेट में दिलचस्पी थी, ध्रुव अपने पिता को दूसरे को सलाम करते हुए देखते थे तो उन्हें पसंद नहीं था कि उनके पिता दूसरे को सामने झुके, उन्हें अपने क्रिकेट पर कड़ी मेहनत की ताकी उनके पिता एक दिन ध्रुव पे गर्व महसुस कर सके और उन्हें किसी के सामने सलाम न करना पड़े, और एक दिन ध्रुव ऐसा करने में कामयाब रहे।

जब ध्रुव थोड़े बड़े हुए तो उनको पिता सरकारी नौकरी की तैयारी करने के लिए प्रेस करने लगे और क्रिकेट खेलने के लिए मन कर दिया था लेकिन उनके बेटे ने मन बना लिया था कि वो क्रिकेट में ही अपना भविष्य बनाएंगे। ध्रुव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि, जब मेरे पिता जी को पता चला कि क्रिकेट किट की कीमत लगभाग 8000 रुपए होगी और वो कीमत सुनकर चौक गए और उन्हें क्रिकेट खेलना बंद करने के लिए कहा, उनके पिता के लिए क्रिकेट किट बर्बाद हो गई नहीं था, वो कहता था कि बेटा सेना में अफसर बने, इस वजह से वो किट नहीं खरीद रहे थे, ऐसे में ध्रुव में कहा कि अगर उन्हें क्रिकेट किट नहीं मिला तो वो घर छोड़ देंगे। ऐसे में उनकी मां ने सोने की चेन बेचकर बेटे को क्रिकेट किट दिलायी ताकि वो खेल सके।

क्रिकेट में ध्रुव की रुचि या आंशिक को देखकर मुझे उनके पिता का समर्थन मिला, ध्रुव उत्तर प्रदेश के लिए अंडर-14 और अंडर-1 आयु क्रिकेट खेल चुके हैं। इसके खराब अनहोन 2020 में बिस्ब कप के लिए भारत की अंडर-19 टीम के कप्तान भी बन गए हैं, उनकी टीम अंडर-19 विशब कप में बांग्लादेश से हार गई थी, लेकिन अनहोन अपनी कप्तान में अंडर-19 एशिया कप जीता था, कैरियर की सुरुआत में ध्रुव ऑफ स्पिन गेंदवाज करते थे लेकिन उनकी गेंदवाजी कुछ खास नहीं थी, इसलिए उन्होंने विकेटकीपिंग में हाथ आजमाया और रोल में उन्हें सभी ने पसंद किया या वो बल्लेबाज के साथ-साथ विकेटकीपर भी बन गए।

2020 का अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में उभरता प्रदर्शन:

ध्रुव जुरेल का ब्रेकथ्रू मोमेंट 2020 के अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में आया, जहां उन्होंने भारत का प्रतिष्ठान बढ़ाया। एक विकेटकीपर-बैट्समैन के रूप में, उन्होंने टीम को सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका उत्कृष्ट प्रदर्शन, स्टंप्स के पीछे और बैट के साथ, ने भारत को टूर्नामेंट में जीत में मदद की। जुरेल के नेतृत्व में भारत की जीत में उनकी क्रिकेट की सूजी थी, जो बांग्लादेश के खिलाफ हुई।

विकेटकीपिंग और बैटिंग कौशल:

ध्रुव जुरेल का विकेटकीपिंग में प्रदर्शन उन्हें सराहा गया है, उनकी तेज अंतरक्रिया और सुरक्षित हाथों ने उन्हें स्टंप्स के पीछे एक विश्वसनीय हस्तक्षेप बना दिया है। इसके अलावा, उनकी बैटिंग कौशलें भी अनदेखी नहीं गई हैं, जिसमें सॉलिड तकनीक और तमामी स्थिति में इनिंग्स को संभालने की क्षमता शामिल है। जुरेल की अनुकूलता विभिन्न मैच परिस्थितियों के साथ उन्हें एक समर्थ क्रिकेटर बनाती है, जिसमें दीर्घकालिक सफलता की संभावना है।

नेतृत्व गुण:

ध्रुव जुरेल के यद्यपि क्रिकेट कौशलों के साथ-साथ उनमें प्रमुख नेतृत्व गुण भी हैं। इन्होंने विश्व कप में भारत की अगुआई करके दिखाया कि उनमें दबाव की स्थितियों का सामना करने और खेत पर रणनीतिक निर्णय लेने की क्षमता है। उनका शांत और संयत व्यवहार, यहाँ तक कि कठिन परिस्थितियों में भी, उनके भविष्य के कैप्टनसी प्रस्पेक्ट्स के लिए अच्छी संकेत हैं।

भविष्य की संभावनाएं:

जबकि ध्रुव जुरेल अपने क्रिकेटीय सफर में बढ़ते और विकसित होते हैं, इस युवा होनहार के लिए भविष्य उज्ज्वल है। विकेटकीपिंग और बैटिंग दोनों में सॉलिड नींव के साथ, साथ ही नेतृत्व क्षमताओं के साथ, वह भारतीय क्रिकेट को सर्वोच्च स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान करने के लिए उचित स्थान पर हैं।

निष्कर्ष:

ध्रुव जुरेल का भारतीय क्रिकेट में उच्चता प्राप्त करना न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा का प्रमाण है, बल्कि यह देशवासियों के लिए एक प्रेरणा भी है। जब वह अपने क्रिकेट सफलता की दिशा में अग्रसर होते हैं, तो प्रशंसक उत्सुकता से इंतजार करते हैं कि ध्रुव जुरेल के उज्ज्वल करियर में और भी यादगार पल होंगे।

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